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तोहफ़ा     मैं तुमको एक इनाम देता हूँ इनाम में तुमको एक नाम देता हूँ  मैं तुमको एक पैग़ाम देता हूँ  पैग़ाम में तुमको प्यार देता हूँ  Ñömāñ Fîkrí
उसका हक़ है  मै कौन होता हूँ उसको रोकने वाला  किसी ओर से इश्क़ करने पर  जब उसको मुझसे इश्क़ नहीं  तो  हक़ है उसको  किसी ओर से इश्क़ करने का 
अब जिया नहीं जाता मुझसे मगर जी रहा हूँ  अब इश्क़ करना मेरे बस में न रहा मगर तुझसे इश्क़ कर रहा हूँ 
मै अपनी ख़ुशी के लिए उसकी ख़ुशियों क़ुर्बान नहीं करना चाहता  इसलिए मै अपनी मोहब्बत का इजहार नहीं करना चाहता 
उसको याद न करुँ तो नींद भी नहीं आती है  सायद नींद को भी  बख़ूबी इल्म  है  उसको याद न करुँ तो नींद भी   अधूरी  होती है 
उसके भी दिल में इश्क़ तो है मगर ज़ुबा से कह नहीं सकती  मेरा दर्द देख कर उसका भी दिल मचलता है  मगर अपनी ज़ुबा से कह नहीं सकती 
घड़े में रखा पानी कितनी भी देर बाद पियो उसका मज़ा अलग होता है कितने  भी दिन बिछड़ा हुआ रहूँ उससे मगर दूबारा मिलने का मज़ा अलग होता है 
मेरा दर्द  होठो से मुस्कुरा कर हम अपने दिल के दर्द को छुपायेंगे  तेरे सामने हम हमेशा यूं ही मुस्कुरायेंगे
नाम का अक्स होता है इंसानो में  हूर तो  नहीं है वो मगर हूर सी लगती है  सायद हूर के नाम का अक्स है  इसलिए हूर सी लगती है 
मेरे ख़याल ऐ काश कहीं ऐसा होता  मेरा दिल उसके सीने में होता  उसका दिल मेरे सीने में होता  वो मेरे दिल का हाल जानती  मै उसके दिल का हाल जानता